Current Affairs 20-21 March 2018

  1. ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिंदी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह का निधन

हिंदी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह का 19 मार्च 2018 को नई दिल्ली में निधन हो गया. वे 83 वर्ष के थे. केदारनाथ सिंह रचना प्रक्रिया, साहित्य और हिंदी को लेकर राजनीति पर खुलकर बात करते थे. उन्हें जटिल विषयों पर सहज शब्दावली का प्रयोग करने के लिए भी जाना जाता है. केदारनाथ सिंह को उनकी रचनाओं के लिए वर्ष 2013 में साहित्य के सबसे बड़े सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

  1. भारत और फ्रांस का संयुक्त नौसेनिक युद्धाभ्यास 'वरुण-2018' आरंभ

भारत और फ्रांस के बीच पहला संयुक्त नौसेनिक युद्धाभ्यास 'वरुण-2018', 19 मार्च 2018 को गोवा के वास्को डी गामा स्थित मार्मागोवा पोर्ट ट्रस्ट पर आयोजित किया गया. यह युद्धाभ्यास गोवा के तट से दूर, अरब सागर में आयोजित किया जायेगा. '

वरुण-2018' के मुख्य बिंदु
• फ्रांस की सबमरीन एवं फ्रिगेट जीन डी वियन तथा भारतीय विध्वंसक आईएनएस मुंबई तथा फ्रिगेट त्रिखंड इस युद्धाभ्यास में शामिल होंगे. साथ ही नौसेना के हेलिकॉप्टर भी इस युद्धाभ्यास में भाग ले रहे हैं.
• इसके अलावा, भारतीय सबमरीन कलवरी, पी8-1 एवं डोर्निएर मेरीटाइम पट्रोल एयरक्राफ्ट एवं एक मिग 29के लड़ाकू विमान भी इस युद्धाभ्यास में शामिल होंगे.
• पहले चरण का युद्धाभ्यास 24 मार्च 2018 को समाप्त होगा.
• इस अभ्यास का दूसरा एवं तीसरा चरण क्रमशः चेन्नई तट पर अप्रैल में तथा ला रीयूनियन आइलैंड पर मई 2018 में आयोजित किया जायेगा.

भारत और फ्रांस की नौसेना में मध्य वर्ष 1983 से नौसेनिक युद्धाभ्यास चला आ रहा है. इन्हें वर्ष 2001 से वरुण युद्धाभ्यास के नाम से जाना जाने लगा.

  1. राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्म पुरस्कार  वितरित किये

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 20 मार्च 2018 को राष्‍ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्‍कार प्रदान किए. पद्म पुरस्कार अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है.

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्‍य व्‍यक्तियों में भारत के उपराष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्‍यक्ष और अनेक केन्‍द्रीय मंत्री भी शामिल थे. इस साल विभिन्न क्षेत्र की 84 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जा रहा है. इनमें से 43 पुरस्कार प्रदान किए गए. शेष को 2 अप्रैल 2018 को सम्मानित किया जाएगा.

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  1. आरटीआई आवेदन के लिए नहीं वसूल सकते 50 रुपये से अधिक फीस: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च 2018 को कहा कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दिए जाने वाले आवेदनों के लिए अधिकतम शुल्क 50 रुपये होगा और जवाब की हर कॉपी के लिए अधिकतम 5 रुपये प्रति पेज फोटोकॉपी शुल्क लिया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश हाईकोर्ट और विधानसभाओं समेत आरटीआई कानून के दायरे में आने वाली सभी स्वायत्त संस्थाओं पर लागू होगा.

  1. एससी/एसटी कानून के तहत होने वाली त्वरित गिरफ्तारियों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

सुप्रीम कोर्ट ने 'अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) 1989 कानून' के दुरुपयोग को देखते हुए इन मामलों में होने वाली त्वरित गिरफ्तारियों पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके अंतर्गत गिरफ्तारियों से पहले डीएसपी स्तर के अधिकारी द्वारा प्राथमिक जांच कराने के आदेश दिए हैं. वहीं, कोर्ट ने इन मामलों में सरकारी कर्मचारियों को अग्रिम ज़मानत की मंज़ूरी दी है.

  1. कर्नाटक सरकार द्वारा लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने की सिफारिश मंजूर

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने 19 मार्च 2018 को लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने की मांग मंजूर कर ली है. इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेजा गया है. लिंगायत की मांग पर विचार करने के लिए नागमोहन दास समिति गठित की गई थी. राज्य की कैबिनेट ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है. कर्नाटक ने इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र के पास भेज दिया है. लिंगायत समाज को कर्नाटक के अगड़ी जातियों में गिना जाता है. कर्नाटक में करीब 18 प्रतिशत लिंगायत समुदाय के लोग हैं.

लिंगायत कौन हैं?
बारहवीं सदी में समाज सुधारक बासवन्ना ने हिंदुओं में जाति व्यवस्था में दमन के खिलाफ आंदोलन आरंभ किया था. उस आंदोलन के दौरान बासवन्ना ने वेदों को खारिज किया और वह मूर्ति पूजा के भी खिलाफ थे. आम मान्यता यह है कि वीरशैव और लिंगायत एक ही हैं. वहीं लिंगायतों का मानना है कि वीरशैव लोगों का अस्तित्व बासवन्ना के उदय से भी पहले था और वीरशैव भगवान शिव की पूजा करते हैं. लिंगायत समुदाय के लोगों का कहना है कि वे शिव की पूजा नहीं करते बल्कि अपने शरीर पर इष्टलिंग धारण करते हैं. यह एक गेंदनुमा आकृति होती है, जिसे वे धागे से अपने शरीर से बांधते हैं. लिंगायत इष्टलिंग को आंतरिक चेतना का प्रतीक मानते हैं. बासवन्ना का अनुयायी बनने के लिए जिन लोगों ने अपने धर्म को छोड़ा वे बनजिगा लिंगायत कहे गए.

 

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