उत्तराखंड में पंवार वंश  Panwar Dynasty in Uttarakhand 

पंवार वंश

गढ़वाल छेत्र सैन्य शक्ति के अभाव में 52 छोटे-छोटे गढ़ों (किले) में बंटा हुआ था। यह गढ़ ठकुरी राजाओं के अधीन थे। पंवार वंश का संस्थापक एवं चांदपुरगढ़ का राजा भानुप्रताप अपने समकालीन गढ़पतियों में सर्वाधिक शक्तिशाली था। 887 ई. में मालबा के राजकुमार कनकपाल बद्रीनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गढ़वाल छेत्र में आये थे। राजा भानुप्रताप ने तीर्थाटन पे आये कनकपाल का जोरदार स्वागत किया और अपनी पुत्री का विवाह उसके साथ कर दिया। तब से गढ़वाल में परमार वंश की स्थापना हुई. पंवार वंश या परमार वंश ने 888 से अगस्त 1949 (टिहरी राज्य के भारत में विलय ) तक गढ़वाल छेत्र पर शाशन किया. इस दौरान 60 राजाओं ने शाशन को  चलाया जिनमे की राजा अजयपाल सर्वाधिक ख्याति प्राप्त है।

      राजा अजयपाल ( सन 1500 से 1519 तक) पंवार वंश के 37 वें शाशक थे। इन्होने गढ़वाल छेत्र के सभी गढ़ों को जीत एक विशाल राज्य की नीव रखी। गढ़वाल के एकीकरण का श्रेय इन्हें ही जाता है। इन्होने राज्य विस्तार के बाद अपनी राजधानी चांदपुरगढ़ी से देवलगढ़ स्थानान्तरित की और अंततः सन 1517 में श्रीनगर । निसंदेह ही राजा अजयपाल को गढ़वाल छेत्र का सबसे बलशाली राजा माना जा सकता है। इन्होने ही कत्युरी शासकों से स्वर्ण सिंहासन छीना था। देवलगढ़ स्तिथ राजराजेश्वरी मंदिर का निर्माण भी राजा अजयपाल द्वारा हुआ

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Uttarakhand Government Portfolio

राज्यपाल(Governor) डा कृष्णकांत पाल (Krishn Kant Paul) उत्तराखण्ड के 6 वें राज्यपाल है। उन्होंने 8 January 2015 को पदभार संभाला। 

मुख्य सचिव (Chief Secretary)- उत्पल कुमार सिंह (Utpal Kumar Singh ) ने अक्टूबर  2017  में उत्तराखण्ड के 15  वें मुख्य सचिव का पदभार संभाला। उन्होंने एस रामास्वामीकी जगह ली ।

मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के ऍम जोसेफ (k.m.Joseph) नैनीताल स्तिथ उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के 9 वें मुख्य न्यायाधीश है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस.एच.कपाडिया (S. H. Kapadia) और जे एस खेहर (J. S. Khehar) बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश बने।

महाधिवक्ता (Attorney General)- सूर्य नारायण बाबुलकर उत्तराखंड के महाधिवक्ता पद पर है।नैनातील हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बाबुलकर निशंक सरकार के दौरान भी वर्ष 2010 में महाधिवक्ता रह चुके हैं।

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Uttarakhand Rajy Aandolan - Part 2

उत्तर प्रदेश की सपा सरकार द्वारा सन जून 1994 में सरकारी नौकरी एवं शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की नयी व्यवस्था लागू की, जिसमे की कुल सीटों का 50% सीट आरक्षित होने की व्यवस्था थी। इसमें 27 % ओबीसी , 21% अनुसूचित जाति एवं 2% अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थी। इस आरक्षण नीति के विरुद्ध राज्य में आन्दोलन शुरु हुए। इन्द्रमणि बडोनी (उत्तराखण्ड के गांधी) आरक्षण नीति के विरुद्ध 7 अगस्त को पौड़ी गढ़वाल में आमरण अनशन पर बैठ गये। अनशनकारियों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज भी हुआ। काशी सिंह ऐरी के नेतृत्व में 15 अगस्त को नैनीताल में आमरण अनशन शुरु हुआ।
अबतक शांतिपूर्ण चल रहे राज्य आन्दोलन में लाठीचार्ज एवं अन्य हिंसक घटनाये घटित होने लगी इसी क्रम में 1 सितम्बर 1994 को उधमसिंह नगर के खटीमा में पूर्व सैनिक एवं छात्रों की रैली पर गोली चलाये जाने से 25 लोगों की मृत्यु हुई। इस घटना पर विरोध प्रकट करने के लिए मसूरी के झुलाघर में आयोजित रैली ने उत्तेजित होकर पुलिस तथा पीएसी पर हमला कर दिया। इस घटना में पुलिस उपनीरक्षक उमाकांत त्रिपाठी मारे गये। फिर पुलिस द्वारा गोली चलाये जाने पर 8 आंदोलनकारी मारे गये जिनमे दो महिलाये हंसा धनाई व बेलमती चौहान भी शामिल थी।

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Uttarakhand Rajy Aandolan - Part 1

सर्वप्रथम उत्तराखण्ड राज्य की मांग श्रीनगर में 5-6 मई 1938 में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में हुई, अधिवेशन की अध्यक्षता कर रहे श्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने भी इसका समर्थन किया. उस समय जो आज में उत्तराखण्ड राज्य है तब वह आधा हिस्सा अंग्रेजी शाशन और टिहरी राज्य राजा के अधीन था. श्री देव सुमन ने टिहरी राज्य के खिलाफ आन्दोलन किये , सन 1938 में पृथक राज्य की मांग करते हुए उन्होंने गढ़देश सेवा संघनामक संगठन की स्थापना की, बाद में इसका नाम हिमालय सेवा संघकर दिया गया।
आजादी से पहले सन 1946 में हल्द्वानी में बद्रीदत्त पांडे की अध्यक्षता में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक सम्मेलन में उत्तरांचल के पर्वतीय भू-भाग को विशेष वर्ग में रखने की मांग उठायी। इसी सम्मलेन में अनुसूया प्रसाद बहुगुणा ने गढ़वाल- कुमांऊ को मिलाकर एक छेत्रीय भौगोलिक इकाई के रूप में गठित करने की मांग की. संयुक्त प्रान्त के तत्काल्लीन प्रीमियर गोविन्द बल्लभ पंत ने इस मांग को ठुकरा दिया।

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Uttarakhand Khel Ratna Devbhumi Dronacharya Award

उत्तराखण्ड राज्य द्रोणाचार्य पुरस्कार शुरुआत करने की घोषणा सन 2013 में तत्कालीन खेल मंत्री श्री दिनेश अग्रवाल ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर की थी. हर वर्ष राज्य निर्माण दिवस (9 नवम्बर) के अवसर पर खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाडियों को खेल रत्न एवं कोच को द्रोणाचार्य पुरुस्कार से सन्मानित किया जायेगा। हर खेल रत्न विजेता को 5 लाख एवं कोच को 3 लाख रूपये के पुरुस्कार से सम्मानित किया जायेगा. 09 नवम्बर 2013 को प्रथम बार ये पुरूस्कार दिए गये थे

देवभूमि द्रोणाचार्य खेल पुरस्कार विजेता (क्रमवार)

  1. हरि सिंह थापा - बॉक्सिंगनैनी सैंनी गॉंव, पिथौरागढ़
  2. नारायण सिंह राणा - निशानेबाज प्रशिक्षक
  3. रेणु कोहलीएथलेटिक्स
  4. सुरेंद्र सिंह भंडारी ओलंपियन- सर्विसेज के कोच
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पंचप्रयाग एवं नदियाँ

पंच प्रयाग-  देवप्रयाग ,रुद्रप्रयाग,  कर्णप्रयाग , नंदप्रयाग, विष्णुप्रयाग

  1. देवप्रयाग अलकनंदा और भागीरथी नदी के संगम पर , भागीरथी नदी को सास तथा अलकनंदा को बहु भी कहते है.
  2. रुद्रप्रयाग अलकनंदा और मन्दाकिनी नदी के संगम पर
  3. कर्णप्रयाग अलकनंदा और पिंडर नदी के संगम पर
  4. नंदप्रयाग अलकनंदा और नंदाकिनी नदी के संगम पर
  5. विष्णुप्रयाग अलकनंदा और धौलीगंगा के संगम पर

नदियों पे आधारित प्रश्न

  1. भिलंगना नदी कहाँ से निकलती है ? – खतलिंग ग्लेशियर
  2. अलकनंदा नदी की लम्बाई है 195 km
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National Park In Uttarakhand

There are five national parks in Uttarakhand. Corbett national park is the first national park established in India 1936. Questions on these national park's are asked in almost every competitive examination of the state conducted by UKPSC, UKSSSC, UBTER, UJVNL, GBPAUT and others. A brief summary of these national parks is provided below followed by questions and answer.

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Peaks in Uttarakhand State

Uttarakhand Being a Himalayan state contains many peaks, Nandadevi Peak (west) is the highest peak of the state followed by Kamet both located in Chamoli district of the state. Time to time many questions has been asked from this topic. Questions can be simple like Who is the highest peak of the state? or it can be Arrange the following peaks according to their heights. Read below for the list of peaks in Uttarakhand State. The peaks are arranged in order with highest peak at the top.   
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WildLife Sanctuary Of Uttarakhand State

There are seven wildlife Sanctuaries in Uttarakhand state. Questions from wildlife Sanctuaries are regularly asked in various competitive examination such as Group C, Lecturer, Review Officer, PCS and in many more. Below is the detail of wildlife Sanctuaries of the Uttrakhand state.

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